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S.E.C.L. के खिलाफ लामबंद किसान, नहीं देंगे जमीन

धरमजयगढ़- S.E.C.L. की प्रस्तावित दुर्गापुर-2 खुली खदान में कंपनी द्वारा C.B. Act के तहत कार्रवाई करने तथा जिला अध्यक्ष एवं अनु. अधिकारी के परिसीमन के बाद धारा 21-22 के परिचालन एवं गणना के लिए उड़ाए गए ड्रोन को लेकर रविवार शाम शाहपुर कॉलोनी में आम सभा आयोजित की गई। वर्ष 2016 के बाद महापंचायत के पश्चात पहली बार इस तरह की बैठक आयोजित की गई।


S.E.C.L. द्वारा फरवरी 2016 में धारा 11 के प्रकाशन के बाद धीरे-धीरे अपनी कार्रवाई आगे बढ़ाते हुए अब वर्ष 2026 में धारा 21-22 के परिचालन तथा प्रस्तावित क्षेत्रों में प्रारंभिक गणना के लिए कोल खनन कार्य करने वाले ठेकेदारों के लिए प्राक्कलन तैयार करने हेतु शासन-प्रशासन से स्वीकृति लेकर कार्रवाई किए जाने के बाद बैठक बुलाई गई।


प्रारंभिक सर्वे के लिए पिछले सप्ताह S.E.C.L. महाप्रबंधक एवं उनकी टीम द्वारा मां अंबे परिसर में प्रभावित किसानों की बैठक बुलाई गई थी। भारी विरोध के कारण महाप्रबंधक द्वारा कहा गया कि जमीन नहीं देने पर खदान वर्तमान में नहीं खुलेगी। परियोजना 10 वर्ष पीछे चली जाए, लेकिन परियोजना वापस नहीं होगी।


इसके कुछ दिन बाद स्थानीय कुछ जनप्रतिनिधियों एवं किसानों ने जिला अध्यक्ष तथा प्रबंधन के पास जाकर कंपनी द्वारा दिए जाने वाले मुआवजा दर को बढ़ाने की मांग रखी। वहीं ड्रोन से सर्वे का कार्य पूरा होने के दूसरे दिन सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों ने ड्रोन उड़ाए जाने एवं परिसीमन को लेकर स्वीकृति आदेश प्राप्त करने के लिए थाना धरमजयगढ़ में जाकर शिकायत दर्ज कराई।


बैठक में ग्रामीणों द्वारा पूर्व की भांति अपनी मांग दोहराते हुए जमीन नहीं देने की बात कही गई। साथ ही भूमि का अधिकतम दर 1 करोड़ रुपये करने तथा मुख्यमंत्री साय जी और कानून की शरण में जाने का निर्णय लिया गया।


गौरतलब है कि वर्ष 2011-12 में D.V. पावर के विरुद्ध कोर्ट जाने के बाद अचानक केस वापस ले लिया गया था। वही लोग आज फिर कोर्ट जाने की सलाह दे रहे हैं। बैठक में परियोजना से प्रभावित लोगों एवं कम भूमि वाले किसानों ने भी विरोध में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।


सवाल स्पष्ट है कि जब धारा 4 से 21-22 की प्रक्रिया पूर्णता की ओर बढ़ चुकी है, तब किसान पूर्व की भांति जमीन नहीं देने की बात कर रहे हैं। ऐसे में सत्ताधारी दल के लोगों का मौन रहना क्या खदान खुलने की प्रक्रिया को रोक सकता है? वहीं सत्ताधारी दल के लोग पिछले 15 वर्षों से क्या कर रहे थे? किसानों द्वारा एक बार फिर भूमि का उचित मुआवजा एवं आदर्श पुनर्वास नीति में संशोधन करने तथा जमीन नहीं देने की बात सत्ता पक्ष के सामने रखी गई।


फिलहाल वर्तमान प्रभावित एवं अनुभावित किसानों की बैठक में एक बार फिर "जमीन नहीं देंगे" का उद्घोष किया गया।b

संपादक : दीपक कुमार हलदार
मेरा नाम दीपक कुमार हलदार है, और मैं Hamar Goth News 24 का संस्थापक एवं संपादक हूँ।

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