
धर्मजयगढ़- एसईसीएल की प्रस्तावित दुर्गापुर-2 ओपन कास्ट कोयला परियोजना, जो वर्षों से स्थानीय विरोध के कारण शुरू नहीं हो सकी थी, अब नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है।सूत्रों के , जानकारी के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों के लगभग 90 प्रतिशत किसान खदान परियोजना के लिए अपनी भूमि देने पर सहमति जताने लगे हैं।
करीब 1670 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रस्तावित इस परियोजना के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2014 तक भूमि संबंधी अधिकार एसईसीएल को प्रदान किए जा चुके थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर विरोध के चलते परियोजना शुरू नहीं हो पाई थी।
प्रस्तावित परियोजना में ग्राम दुर्गापुर, धर्मजयगढ़ कॉलोनी एवं शाहपुर कॉलोनी सहित लगभग 4144 एकड़ भूमि अधिग्रहित क्षेत्र में शामिल है। इसमें राजस्व भूमि के साथ-साथ छोटे एवं बड़े झाड़ की लगभग 252 हेक्टेयर भूमि भी शामिल बताई जा रही है। परियोजना से लगभग 2000 से 2022 परिवार प्रभावित होने का अनुमान है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पूर्व में वेदांता एवं डीवी पावर कंपनी से जुड़े नुमाइंदों अग्र प्रतिनिधियों भारी भरकम सेवा शुल्क प्रदान की थी तथा 10 वर्षों से विरुद्ध जाता रहे हैं जब उन्हें कुछ ना पाने / मिलने की उम्मीद न होने पर कंडीशन रख समर्थन करने के लिए कंपनी को दे रहे हैं ।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तराईमार और बायसी क्षेत्र के किसानों ने बैठक कर भूमि देने के पक्ष में सहमति व्यक्त की है। वहीं धर्मजयगढ़ कॉलोनी क्षेत्र के प्रभावित किसानों में भी बड़ी संख्या में लोग एसईसीएल को जमीन देने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं।
हालांकि कुछ लोगों S.E.C.L का मुख्यालय गए काम नहीं बना तो स्थानीय लोगों व गांव वालों पर दबाव बनकर जमीन न देने की बात कर रहे हैं एक समय इन्हीं लोगों ने में से कुछ लोग D.V पावर को समर्थन देने आगे आए थे । , कुछ लोग अभी भी अपने हितों को ध्यान में रखते हुए ग्राम पंचायत एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर समर्थन नहीं देने का दबाव बना रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पहले जिन लोगों ने निजी कंपनियों को समर्थन दिया था, वे अब एसईसीएल परियोजना का विरोध कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार परियोजना से संबंधित कई प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं आगे बढ़ चुकी हैं। प्रभावित किसानों का मानना है कि खदान परियोजना में लगातार हो रही देरी से क्षेत्र के विकास और संभावित लाभों पर असर पड़ा है। ऐसे में अब बड़ी संख्या में किसान भूमि देने के लिए तैयार हो रहे हैं।
प्रभावित किसानों ने मांग की है कि एसईसीएल द्वारा नियमानुसार उचित मुआवजा, आदर्श पुनर्वास नीति, रोजगार, विस्थापन पैकेज तथा अन्य सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों के हितों की रक्षा हो सके।
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