
DMF की तरह वापस न लौट जाए विकास की राशि? धरमजयगढ़ की जनता पूछ रही—घोषणाएं कब बनेंगी हकीकत?
धरमजयगढ़- मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के धरमजयगढ़ प्रवास के दौरान मंच से करोड़ों रुपये के विकास कार्यों की घोषणा ने नगरवासियों में विकास की नई उम्मीद जगाई थी। लेकिन घोषणा के करीब 11 माह बाद अब जाकर नगर पंचायत धरमजयगढ़ को निर्माण कार्यों के लिए प्रशासकीय स्वीकृति मिली है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि प्रशासकीय स्वीकृति के बाद फंड कब जारी होगा और धरातल पर विकास कार्य आखिर कब शुरू होंगे?
मुख्यमंत्री के धरमजयगढ़ प्रवास के दौरान नगर विकास के लिए लगभग 11 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की घोषणा की गई थी। इसके अलावा स्वास्थ्य और विद्युत विभाग से जुड़े कार्यों की भी घोषणाएं हुई थीं। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद नगर की जनता को उम्मीद थी कि विकास कार्य जल्द शुरू होंगे और लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान होगा। लेकिन करीब 11 महीने बाद मिली प्रशासकीय स्वीकृति ने एक बार फिर सरकारी घोषणाओं की रफ्तार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घोषणा से स्वीकृति तक 11 महीने... अब फंड का इंतजार कितना लंबा?
प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद अब अगला सवाल टेंडर प्रक्रिया और फंड जारी होने को लेकर है। आखिर टेंडर कब होगा? निर्माण एजेंसी कब तय होगी? फंड कब जारी होगा? और धरमजयगढ़ की जनता को विकास कार्यों का लाभ कब मिलेगा?
इन सवालों का जवाब नगरवासियों को अब जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों औरन सवालों का जवाब नगरवासियों को अब जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से चाहिए।
DMF फंड का क्या हुआ? 1 करोड़ की राशि वापस लौटने पर भी सवाल बरकरार
वहीं, नगर पंचायत धरमजयगढ़ के विकास से जुड़ा एक और मामला अब चर्चा में है। पिछले वर्ष DMF फंड से करीब 1 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत होने और फंड जारी होने की बात सामने आई थी। बताया जाता है कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने तक यह राशि नगर पंचायत के खाते में जमा रही, लेकिन कुछ समय बाद राशि वापस लौट गई।
अब सवाल यह है कि जब विकास कार्य के लिए राशि स्वीकृत होकर नगर पंचायत के खाते में आ गई थी, तो फिर वह राशि वापस क्यों हुई? क्या समय पर टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हुई? क्या कार्ययोजना में कोई कमी थी? या फिर किसी अन्य कारण से राशि वापस करनी पड़ी?
इस पूरे मामले को लेकर नगर पंचायत और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की ओर से जनता के सामने स्पष्ट जानकारी नहीं आने से सवाल और गहरे होते जा रहे हैं।
धरमजयगढ़ की जनता ने भाजपा के 'ट्रिपल इंजन सरकार' पर भरोसा जताते हुए नगर विकास की बड़ी उम्मीदें लगाई थीं। जनता को उम्मीद थी कि प्रदेश में भाजपा सरकार, नगर में भाजपा समर्थित नेतृत्व और संगठन के मजबूत तालमेल से विकास कार्यों को गति मिलेगी।
लेकिन यदि मुख्यमंत्री की घोषणा के 11 महीने बाद सिर्फ प्रशासकीय स्वीकृति मिलती है और इसके बाद भी फंड तथा टेंडर के लिए लंबा इंतजार करना पड़े, तो जनता के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।
वहीं, विपक्ष और राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि क्या विकास कार्यों की रफ्तार चुनावी समय के करीब आते-आते तेज होगी? क्या करोड़ों की घोषणाओं को धरातल पर उतारने की कवायद चुनाव से पहले पूरी की जाएगी? या फिर जनता को एक बार फिर सिर्फ घोषणाओं और आश्वासनों से ही संतोष करना पड़ेगा?
सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
नगर के विकास को लेकर स्थानीय सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। जनता जानना चाहती है कि जब मुख्यमंत्री स्वयं नगर के विकास के लिए करोड़ों रुपये की घोषणा कर चुके हैं, तो इन घोषणाओं को समय पर अमलीजामा पहनाने के लिए स्थानीय स्तर पर कितनी गंभीरता से प्रयास किए गए?
वहीं, DMF की स्वीकृत राशि वापस लौटने के मामले में भी जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ सकती है। आखिर किस स्तर पर चूक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार था—यह सवाल आज भी अनुत्तरित है।
अब जनता हिसाब चाहती है, सिर्फ घोषणा नहीं
धरमजयगढ़ की जनता अब केवल मंच से होने वाली घोषणाएं नहीं, बल्कि स्वीकृति से आगे बढ़कर टेंडर, फंड और जमीन पर दिखाई देने वाला विकास चाहती है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद मिली प्रशासकीय स्वीकृति कितनी जल्दी धरातल पर उतरती है। क्या इस बार विकास कार्य समय पर शुरू होंगे या फिर DMF फंड की तरह यह राशि भी प्रक्रिया और फाइलों के बीच उलझकर रह जाएगी?
जनता का सीधा सवाल है—घोषणा हो गई, स्वीकृति भी मिल गई... अब विकास कार्य शुरू होने की तारीख कब बताएंगे जिम्मेदार?
Leave Your Comment