
धरमजयगढ़ - मॉ अंबे की पावन धरा पर रविवार को एक प्रदेश स्तरीय सत्ता पक्ष के प्रतिनिधी एवं रायगढ़ S.E.C .L . की महाप्रबंधक टीम के साथ प्रभावित किसानों के साथ अहम बैठक संपन्न हुई बैठक मूल मुद्दे से हटकर मुआवजा को लेकर वाद-विवाद होकर अनिर्णायक रहा ।
S.E.C.L . की दुर्गापुर 2 खदान के लिए 4144 एकड़ भूमि का धारा 11 ( C.B. ACT ) के तहत फरवरी 2016 में हो चुकी है। धारा ॥ के नियमों के अनुसार भूमि पर से समस्त अधिकार S.E.C.L.को प्राप्त हो चुकी है । कोल कंपनी के द्वारा किसानों से समन्यवय पूर्वक बात - चीत कर सौंदर्यपूर्ण वातावरण में किसानों का भूमि अधिग्रहण करना चाहता है। लेकिन धारा 11 के बाद कुछ अप्रभावित किसान व स्वार्थी लोग अधिग्रहण संबंधी बातें को दर किनार करते हुए मुआवजा को लेकर विवाद करते हुए विरोध जताते रहे। है। और 10 -12 वर्षों से अपने मनतव्य से विचलित नहीं हुए ।
पिछले 10 - 12 वर्षों से S.E.C.L . ने स्थानीय विरोध को झेलते हुए कछुए की चाल से अधिग्रहण के अंतिम चरण धारा 21 - 22 तक पहुंच गए परंतु अब भी विरोध मुआवजा को लेकर रहा । जहां कोल कंपनी के द्वारा गणना के लिए ड्रोन उड़ाकर करना चाहता है । जिसके लिए जिलाध्यक्ष अनु.अधि . (रा०)के सहमति प्राप्त होने के उपरांत,स्थानीय जनता का सहयोग पाने के लिए बैठक का मुद्दा था उस पर चर्चा ही नहीं हो सका ।
अहम मुद्दे से हटकर मुआवजा पुनर्वास की राग किसानो द्वारा
प्रभावित किसान जमीन की उचित मुआवजा को लेकर बाद - विवाद कर करता रहा है जमीन नहीं देने की बात नहीं हो रहा है ।कभी किसानों की प्रतिनिधिमंडल बनकर रायगढ़ कार्यालय हो या स्थानीय स्तर पर कोल कंपनी के साथ बैठक हो नौकरी और मुआवजा की बात होती रही । चूंकि भूमि का मुआवजा राज्य सरकार की निर्णायक दर , बाजार मूल्य के आधार पर निर्धारित होती है ।राज्य सरकार के गजट में प्रकाशन के अनुरूप होता है
प्रभावित क्षेत्र भाजपामय है । केंद्र व राज्य सरकार भाजपा की है। इन भाजपाइयों को अपने मंत्री मंडल से आज दस वर्षों से मुआवजा संबंधित चर्चा नहीं की और ना ही मांग की है । अपने स्वार्थ पूर्ति के लिए किसानों को भड़काते रहते हैं। प्रभावित क्षेत्र के किसान सामने तो नहीं पर आपस में चर्चाएं करती है कि शासन की नीतियों के चक्कर में खेती - बाड़ी में नुकसान हो रहा है।बच्चों को रोजगार नहीं मिल रहा है। जितना जल्दी हो जमीन कंपनी अधिग्रहण कर बच्चों को रोजगार दे और कृषि से होने वाले नुकसान से निजात पाए ।
आज अनिर्णायक बैठक में प्रभावित ग्रामों के सैकड़ो किसान व कोल कंपनी रायगढ़ जिले के महाप्रबंधक प्रबंधक एलेंडर , अमीन कई कर्मचारी उपस्थित थे जिसमें कई ग्राम के किसान अपना पक्ष रखें ।परंतु S.E.C.L . के महाप्रबंधक ने साफ शब्दों में कह दिया आप लोग जमीन नहीं देने पर खदान नहीं खुलेगी सवाल उठता है कि S.E.C.Lपिछले 10 वर्षों से यही कहता रहा और अंदर ही अंदर राजस्व व फॉरेस्ट लैंड व शासकीय संपति की मुआवजा क्लियर करने की स्थिति पर पहुंच गई है और राज्य सरकार की जिलाध्यक्ष स्थानीय अधिकारी की सहमति के बाद किसानों का विरोध कंपनी को रोक पायेगा।अब जब
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