
धरमजयगढ़-धरमजयगढ़ वनमंडल में मनरेगा के तहत किए गए कार्यों की जांच में ऐसा विस्फोटक खुलासा हुआ है जिसने पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता को सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है। विभाग की फाइलों से सामने आया यह फर्जीवाड़ा सामान्य गड़बड़ी नहीं, बल्कि पेशेवर स्तर पर की गई योजनाबद्ध हेराफेरी का उदाहरण है।
**साल 2017 में मौत… पर 2022 में मजदूरी!
कागज़ों में ‘जिंदा मजदूर’ बनकर करता रहा काम भंडारीमुड़ा नर्सरी में 2021 में किए गए पौधरोपण कार्य की जांच में पता चला कि जिस मजदूर की 22 दिसंबर 2017 को मृत्यु हो चुकी थी, उसी मृत व्यक्ति का नाम—3 मई 2022 से 8 मई 2022 तक मस्टररोल में दर्ज,
जॉब कार्ड अपडेट,,मजदूरी भुगतान भी जारी,और कार्य रिपोर्ट में “काम किया” का उल्लेख।यह घोटाला विभागीय रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर करारा तमाचा है।कागज़ों में मृत व्यक्ति को ज़िंदा दिखाना सिर्फ लापरवाही नहीं—
यह भ्रष्टाचार का खुला, सोच-समझकर किया गया खेल है।
**वन विभाग की कार्यशैली पर सीधे सवाल —
यह फर्जीवाड़ा बिना आंतरिक मिलीभगत के संभव नहीं,मस्टररोल, भुगतान सूची और जॉब कार्ड जैसे बुनियादी दस्तावेज़ों में इस स्तर की छेड़छाड़ यह संकेत देती है कि:रिकॉर्ड को जानबूझकर बदला गय भुगतान की प्रक्रिया में गम्भीर गड़बड़ियाँ हैं, और विभाग के भीतर संगठित स्तर पर हेराफेरी हुई है।मनरेगा जैसी पारदर्शी योजना में मृत व्यक्ति को ‘सक्रिय मजदूर’ दिखाना भ्रष्टाचार की परतों को उजागर करने के लिए पर्याप्त है।
**अब सबसे बड़ा सवाल —
यह मजदूरी आखिरकार किसकी जेब में गई?
मृत व्यक्ति से “कराए गए काम” का भुगतान किसने उठाया?
किसने दस्तावेज़ों को अपडेट किया?
कौन इस पूरे नेटवर्क को चला रहा था?
ये सवाल विभाग की जिम्मेदारी पर सीधी चोट हैं।
**जांच और कार्रवाई की मांग तेज — विभाग की परीक्षा शुरू —
यह प्रकरण सिर्फ एक रिकॉर्ड एरर नहीं बल्कि सरकारी धन की सुनियोजित लूट का प्रत्यक्ष सबूत है।अब यह देखना होगा कि वनमंडलाधिकारी इस घोटाले की तह तक जाते हैं या मामला अन्य कागज़ों की तरह धूल में दबा दिया जाता है।
Leave Your Comment