धरमजयगढ़-धरमजयगढ़ विकासखंड के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायतें — सागरपुर, जगाल्मोंहा, लक्ष्मीपुर और बसाझार — कल समाजिक अंकेक्षण की ग्रामसभाओं की मेजबानी करने जा रही हैं। ये सभाएं केवल औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि पंचायत व्यवस्था की सच्चाई उजागर करने का एक बड़ा अवसर मानी जा रही हैं।
ग्राम स्तर पर लंबे समय से चल रही अनियमितताओं, फर्जी भुगतान और लाभार्थी चयन में गड़बड़ियों की चर्चा अब खुलकर सामने आने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस बार जांच निष्पक्ष रही तो कई ऐसे “राज़” सामने आ सकते हैं जिन्हें अब तक कागज़ों के नीचे दबा दिया गया था।
सूत्र बताते हैं कि प्रोग्राम ऑफिसर आर.के. पटेल इस अंकेक्षण प्रक्रिया की कमान संभाल रहे हैं, और यदि उन्होंने इस बार सख्ती और पारदर्शिता दिखाई तो यह कार्यवाही ग्राम पंचायतों की कार्यप्रणाली में ऐतिहासिक बदलाव ला सकती है। ग्रामीणों में उम्मीद है कि वे इस अंकेक्षण को केवल दस्तावेज़ी प्रक्रिया न मानकर, एक जनहितकारी जवाबदेही का मंच बनाएंगे।
कई ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ रोजगार सहायकों और पंचायत सचिवों द्वारा योजनाओं के क्रियान्वयन में भारी गड़बड़ियां की गई हैं — मस्टर रोल में फर्जी नाम, अधूरे कार्यों का पूरा भुगतान, और वास्तविक मजदूरों को उनके परिश्रम का पूरा मूल्य न मिलना, आम शिकायतों में शामिल है।
समाजिक अंकेक्षण का उद्देश्य शासन की योजनाओं को ईमानदारी और जवाबदेही के साथ जनता तक पहुँचाना है। किंतु पिछले वर्षों में यह प्रक्रिया कई बार “समझौतों और रस्म अदायगी” तक सीमित रह गई है।
स्थानीय बुद्धिजीवियों का कहना है कि यदि इस बार अधिकारी वर्ग ने पूरी निष्पक्षता के साथ दस्तावेज़ों और कार्यों का परीक्षण किया, तो न केवल रिकवरी और कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होगी, बल्कि जनता का विश्वास शासन तंत्र में दोबारा स्थापित हो सकेगा।
अब पूरा धरमजयगढ़ क्षेत्र इस सवाल पर नजरें गड़ाए हुए है —क्या आर.के. पटेल इस समाजिक अंकेक्षण को औपचारिकता की जंजीरों से मुक्त कर पाएंगेया फिर यह भी बीते वर्षों की तरह एक औपचारिक मंच और कुछ भाषणों तक सिमट कर रह जाएगा?
कल की ग्रामसभाएं तय करेंगी कि धरमजयगढ़ में पारदर्शिता का सूरज उगता है या नहीं।
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