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शाहपुर कॉलोनी की जर्जर आंगनबाड़ी: मासूमों की जान से खिलवाड़ कब तक?

धरमजयगढ़।

     शाहपुर कॉलोनी वार्ड क्रमांक 2 स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की हालत अब बदहाली की नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही की शर्मनाक मिसाल बन चुकी है। वर्ष 2009-10 में निर्मित यह भवन आज पूरी तरह जर्जर हो चुका है। दीवारों में गहरी दरारें हैं, छत से प्लास्टर झड़ रहा है और ढांचा इतना कमजोर हो गया है कि उसमें छोटे-छोटे बच्चों को बैठाना खतरे से खाली नहीं है। कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

बीते चार-पांच वर्षों से मासूम बच्चों को मजबूरन सामुदायिक भवन में पढ़ाया जा रहा है। यह व्यवस्था न तो सुरक्षित है और न ही बच्चों की पढ़ाई के लिए उपयुक्त। हालात इतने खराब हैं कि जब गांव में कोई कार्यक्रम होता है तो बच्चों को बाहर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। यह स्थिति सीधे-सीधे बच्चों के भविष्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका कई बार संबंधित विभाग व प्रशासन को लिखित आवेदन दे चुकी हैं। गांव के लोगों ने मिलकर पंचनामा तैयार कर अधिकारियों को सौंपा, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं। वर्षों से समस्या जस की तस बनी हुई है।

सबसे गंभीर बात यह है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि—चाहे पार्षद हों, अध्यक्ष हों या अन्य जिम्मेदार लोग—इस ज्वलंत समस्या को नजरअंदाज करते हुए आगे बढ़ जाते हैं। मासूम बच्चों की सुरक्षा से बड़ा कोई मुद्दा नहीं हो सकता, फिर भी उदासीनता चरम पर है।

स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश है। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि समय रहते जर्जर भवन का निरीक्षण कर मरम्मत या नए भवन का निर्माण नहीं कराया गया और कोई अनहोनी घटती है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

अब सवाल यह है कि आखिर कब जागेगा प्रशासन? क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होगी? शाहपुर कॉलोनी की आंगनबाड़ी की यह दुर्दशा तत्काल ठोस कदम उठाने की मांग करती है। मासूम बच्चों की सुरक्षा के साथ अब और खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

संपादक : दीपक कुमार हलदार
मेरा नाम दीपक कुमार हलदार है, और मैं Hamar Goth News 24 का संस्थापक एवं संपादक हूँ।

मैंने इस पोर्टल की स्थापना इस उद्देश्य से की है कि हमारे जैसे छोटे शहरों, गांवों और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ भी मीडिया के मुख्यधारा में शामिल हो सके। Hamar Goth News 24 सिर्फ एक न्यूज़ वेबसाइट नहीं है, यह एक जनमंच है, जहाँ आम लोगों की बातें, समस्याएं, उपलब्धियां और उम्मीदें सुनी और साझा की जाती हैं।

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