
धरमजयगढ़ - दुर्गापुर 2 ओपन कोल माइंस को S. E. C. L. को भारत निजी सरकार व राज्य सरकार द्वारा 4144 एकड़ भूमि शासकीय व पट्टा वाली भूमि धारा 4 (1) फरवरी 2015 प्रकाशन होने के उपरांत S. E. C. L. को हो गया है, कोल कंपनी द्वारा डी जी पी एस सवै के उपरांत अब भूमि, परिपसम्पतियों का पत्रक के साथ पूर्नवास देने की योजना चल रहा है । परन्तु मुआवजा को लेकर अभी भी तकरार और असमंजस बना हुआ है ।
आबंटित भूमि में लगभग 2900 एकड़ निजी भूमि है । तथा अधिग्रहण के समय भूमि का बाजार मूल्य बहुत कम था । इस सत्र में राज्य सरकार द्वारा भूमि का बाजार मूल्य में वृद्धि किया जा रहा । अभी तक आधिकारिक मूल्य नहीं आ पाया है प्रस्तावित प्रोजेक्ट में 7 गांव प्रभावित है तथा सभी गांवों का अलग-अलग बाजार मूल्य है । जिसमें धरमजयगढ़ पुर्नवास कालोनी की सबसे अधिक 2200 एकड़ के पास है । इनकी भूमि पिछले 70 वर्षों से क्रय - विक्रय नहीं हुआ है जिस कारण 2014 में प्रति एकड़ 10 लाख नियमों के तहत बनता आज 12 वर्षों के बाद भी 12% ब्याज के साथ 10 लाख ही बन रहा है ।
चर्चा है सरकार की गाइड लाइन याने वर्तमान बाजार में भूमि का बाजार मूल्य बेहताहाशा वृद्धि किया गया है। इस स्थिति में प्रति एकड़ सिंचित 49 लाख व असिंचित 31 लाख बन रहा है । S. E. C. L. के द्वारा बढ़ी हुई बाजार मूल्य लागू करने पर इस डर का गुणा 04 हो जावेगा । परन्तु E. C. L. की तरह S. E. C. L.भी नई योजना बना रहा है जिसके अंतर्गत वर्तमान दर से 04 गुणा मुआवजा देकर सारी सुविधा , नौकरी से लेकर पूर्नवास तक समाप्त दूसरी प्रति एकड़ 10 लाख के आवस के साथ नौकरी , पुर्नवास की योजना है।
पिछले 12 वर्षो से परियोजना के प्रभावित किसान भूमि का दर के कारण विरोध करते आ रहे है। परन्तु उक्त विरोध कोई काम न आया बल्कि प्रोजेक्ट पीछे हो गया , नौकरी पाने वाले जवान बूढ़ा हो गया है नया पीढ़ी जवान नही हो पाया है जिसका सारा दोष स्थानीय छुटभैये नेता का है उनकी जमीन या तो अधिग्रहण क्षेत्र में न आयी हो या फर्जी तरीकें से भू- स्वामी बना लिया व कुछ कोयला चोरी करने वालो ।
S. E. C. L. के द्वारा अधिग्रहित क्षेत्र में कोयला उत्खनन, परिवहन, मुआवजा वितरण तथा पुर्नवास व पुर्नव्यवास्थापन कराने के लिए टेण्डर जारी किया गया है देश भर के कई कंपनियो के द्वारा साइड़ विजिट कर टेण्डर लेने के उत्सुक नजर आ रहे है। दूसरी तरफ कोल कंपनी द्वारा, एकमुश्त मुआवजा व 2014 - 15 का बाजार मूल्य के साथ नौकरी का प्रयोजल बनाकर C.M. P. D. I. को भेजकर वेरी फाइट करने के उपरांत कोल बोर्ड दिल्ली को स्वीकृति के लिए जावेगा उनके निर्णय के अनुसार आगे की प्रक्रिया प्रारंभ होगी / याने किसान खरीफ की फसल चिन्तायुक्त होकर ले पायेंगे और रबी की फसल तनावग्रस्त होकर ।
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