
धर्मजयगढ़ - भारत सरकार की महत्वकांक्षी "भारत माला " प्रोजेक्ट के तहत् कश्मीर से कन्याकुमारी तक माला की तरह पिरोया जाना है। परियोजना से केवल यातायात में सुधार होगा बल्कि आर्थिक गतिविधियां आसान होंगे क्षेत्रीय विकास, खाद्य, ईंधन स्टेशन, मेडिकल क्लिनिक, ई.वी. चार्जिंग टॉयलेट्स आदि 35 से 50 किलोमीटर पर उपलब्ध होगा। 23/9/2021 भारत का राज्य पत्र में प्रकाशित रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ होते हुए 130A ,4 लाइन सड़क 106.36 किलोमीटर से 145.45 km अनुधरण, प्रबंधन उरगा से पत्थलगांव इकोनामिक कॉरिडोर 1275 करोड़ से बनेगा, सड़क के दोनों और फेंसिंग भी किया जाना है।
उरगा पत्थलगांव कॉरिडोर में धर्मजयगढ़ अनुविभाग के 40 किलोमीटर एरिया से होकर गुजरेगी, परियोजना के अंतर्गत आने वाली भूमि का अर्जन कर मुआवजा भी वितरण हो चुका है। परंतु अनुविभाग के प. ह. न. 33 व 36 मैं 3 किलोमीटर क्षेत्र के सड़क डाइवर्ट होने की प्रत्याशा पर कुछ भू निर्माण माफिया दिन में तारा देखने लगे हैं।
बताना लाजिमी होगा कि अनुविभाग के हल्का नंबर 33 व 36 की अधिग्रहित भूमि पर 2020 में भारत सरकार द्वारा कर्नाटक सरकार की उपक्रम को कोल माइंस के लिए नियमतः भूमि आबंटन किया था , उसी भूमि के ऊपर से भारत सरकार का दूसरा उपक्रम भारत माला परियोजना के लिए 2021 में आबंटित कर भू अधिग्रहण कर लिया, K.P.C.L.परियोजना के बीचो - बीच सड़क निर्माण होने पर कोल माइंस का बहुत बड़ा एरिया में कोल खनन नियमानुसार नहीं कर पाएंगे, भारत सरकार द्वारा प्राप्त कोल माइंस के बीचो - बीच से होकर राष्ट्रीय राजमार्ग गुजरने के कारण कार्य का सरकार क्षुब्ध होकर सुप्रीम कोर्ट को रूख किया,जहां सड़क परिवर्तन करने के लिए रोक लगी हुई है।कोर्ट की रोक लगते ही सड़क परियोजना के इंजीनियरों के द्वारा रूट परिवर्तन के लिए ड्रोन व सर्वे करने पर संभावित अधिग्रहण होने की प्रत्याशा में 3 km क्षेत्र पर भू - निर्माण माफियों के द्वारा, पूर्व की तरह निर्माण की मुआवजा पाने, मध्य प्रदेश की सिंगरौली की तरह संभावित भूमि के ऊपर किसानों को लोभ देकर 1 का 10 पाने की लालसा में निर्माण कार्य करवा लिया।
संभावित एरिया में निर्माण होने पर तथा निर्माण मुआवजा की 20 - 45 प्रतिशत पाने के लोभ में माफिया के चंगुल में फंसे किसान काश्तकारी भी नहीं कर पा रहे हैं। तथा अवैध निर्माण होने व स्थानीय पत्रकारों के द्वारा घटना को हाईलाइट करने पर प्रशासन संज्ञान में लेते हुए जमीन मालिकों को नोटिस भेज कार्यालय में तलब किया, आगे की कारवाही विचाराधीन है ।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय क्या होगा,स्थानीय प्रशासन कार्यालय में पेशी आना,खेती कार्य न कर पाना, माफिया द्वारा गुर्राना, समाचार प्रकाशित करने पर परेशान होना, मुआवजा व मुआवजा का हिस्सा मिलेगा या नहीं, निर्माण पर प्रशासन का डंडा कैसे चलेगा, इसे लेकर वास्तविक किसानों के साथ-साथ स्थानीय लोगो में चर्चा बना हुआ है ।
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