
धर्मजयगढ़ 22000 जनसंख्या,15 वार्डों की नगर पंचायत अपने वार्ड वासियों को शुद्ध पेय जल प्रदान करने के लिए पी एच ई विभाग धर्मजयगढ़ द्वारा जुलाई को बिना निरीक्षण परीक्षण कर नगर पंचायत धर्मजयगढ़ अपने अधिपत्य में ले लिया,उक्त योजना से वार्ड वासियों को शुद्ध पेयजल तो दूर पाईप लाइन से पानी ही नहीं संचालित हो रहा है। न ओवर हैड टैंक।
विदित है कि केंद्र व राज्य सरकार जनता को शुद्ध पेयजल प्रदान करने के लिए करोड़ों रुपए का आवंटन कर रहे हैं। इस योजनांतर्गत धर्मजयगढ़ में पी एच ई विभाग द्वारा मांड नदी से पानी शुद्धिकरण कर वार्ड वासियों को प्रदान करना था। जिसके लिए स्वीकृति 2009-10 में हुआ काम विलंब होने के कारण खर्च लगभग 14 करोड़ तक पहुंच गया। जिसमें 15% नगरी निकाय से सुपरवाइजिंग चार्ज लिया गया।
उक्त 14 करोड़ राशि से विभाग द्वारा तीन ओवर हैड टंकी का निर्माण व सभी वार्डों में पाईप लाइन का विस्तार किया गया। परंतु एक ओवर हैड टैंक छोड़ किसी टंकी चालू नहीं हुआ।
पाईप लाइन विस्तार तो किया सीसी रोड पाइपलाइन विस्तार खोदकर डाला गया। पाईप के ऊपर नियमित: कांक्रीट करना था। उसको अधूरा किया। तथा वार्डों में बनी नालियां धसने लगा जिस कारण नगर पंचायत के पिछला परिषद काम अधूरा कह कर आधिपत्य लेने से मना कर दिया। जिसका गूंज स्थानीय विधायक लालजीत राठिया द्वारा विधानसभा में गूंजा पूर्व पार्षद मांग को लेकर नवंबर में भूख हड़ताल पर बैठा, परंतु सब निराधार।
पीएचसी द्वारा उक्त योजना क्रियान्वयन के बावजूद नगर पंचायत द्वारा विगत 24 माह में 1.50 करोड रुपए का अतिरिक्त पाईप लाइन बिछाया, उधर 2013-14 में राज्य सरकार के भागीरथी नल जल योजनांतर्गत 35लाख रुपए नगर पंचायत धर्मजयगढ़ द्वारा भागीरथी नल जल योजना का कार्य कराया
सवाल उठता है अचानक नगर पंचायत द्वारा अपूर्ण काम को नगर की जनता को गुमराह कर एकाएक चुपचाप अधिपत्य में ले लिया कहीं दाल में काला "शब्द चरितार्थ तो नहीं खैर धर्मजयगढ़ की जनता (सबले बढ़िया) क्योंकि पी एच ई द्वारा अपने आने वाला 20 वर्षों तक पानी व्यवस्था ध्यान में रखकर प्राक्कलन बनाया परंतु चालू होने से पूर्व ही योजना फेल धन्य हो नगर पंचायत धर्मजयगढ़ की परिषद।
Leave Your Comment