
धरमजयगढ़। तहसील मुख्यालय धरमजयगढ़ में अर्जी-नवीसों की कार्यप्रणाली को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि बिना वैध लाइसेंस के आवेदन-पत्र भरने वाले कुछ लोग आम जनता से निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक राशि वसूल रहे हैं। हैरानी की बात यह भी बताई जा रही है कि आवेदन तैयार करने और शुल्क से संबंधित निर्धारित दरों की सार्वजनिक सूची कार्यालय परिसर में स्पष्ट रूप से चस्पा नहीं की गई है, जिससे आम नागरिकों को वास्तविक शुल्क की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए ‘हमर गोठ News 24’ के संपादक ने तहसील धरमजयगढ़ में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी है। आरटीआई के जरिए यह जानने का प्रयास किया गया है कि तहसील कार्यालय में अर्जी-नवीस के रूप में कार्य करने के लिए कितने लोगों को वैध अनुमति या लाइसेंस प्राप्त है, निर्धारित शुल्क क्या है और बिना लाइसेंस आवेदन तैयार करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने अब तक क्या कार्रवाई की है।
वहीं, सूत्रों के अनुसार, तहसीलदार हितेश साहू द्वारा पूर्व में अनियमितताओं के चलते लोक सेवा केंद्र/तहसील कार्यालय से संबंधित एक संचालक की आईडी ब्लॉक किए जाने की कार्रवाई भी की गई थी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर आवेदन-पत्र भरने के नाम पर जनता से मनमानी रकम वसूली जा रही है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? क्या तहसील कार्यालय में अर्जी-नवीसों के लाइसेंस और शुल्क की नियमित जांच होती है? क्या आम जनता को निर्धारित शुल्क की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जाती है?
आरटीआई के जवाब के बाद इस पूरे मामले की तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है। यदि नियमों के उल्लंघन या मनमानी वसूली की पुष्टि होती है, तो यह सीधे तौर पर उन गरीब और ग्रामीण लोगों के साथ अन्याय होगा, जो सरकारी कार्यालयों में अपने जरूरी काम के लिए पहुंचते हैं और जानकारी के अभाव में अतिरिक्त राशि देने को मजबूर हो सकते हैं।
अब देखना यह है कि आरटीआई के जवाब में क्या खुलासा होता है और प्रशासन इस पूरे मामले में क्या कदम उठाता है।
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