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K.P.C.L के खिलाफ प्रभावित किसान जायेगें न्यायपालिका ?

 धरमजयगढ़ → धरमजयगढ़ विधानसभा के अंतर्गत धरमजयगढ़ मुख्यालय के 15 K.M. के अंदर 25000 एकड़ जमीन  कोयला उत्खनन के लिए केन्द्र सरकार ने दे दी है तथा राज्य सरकार भी सहमति दे दी है। जिसमें कर्नाटक पावर कारपोरेशन लिमिटेड कंपनी का काम तेज गति से चल रहा है। इनका धारा 4 के बाद धारा 7 का प्रकाशन राजपत्र में प्रकाशित किया जा चुका है, प्रभावित किसान S.E.C.L. की धारा 21-22 के समय कोर्ट जाने की विचार कर रहे तो K.P.C.L. की प्रारंभिक स्थिति है इनके लिए एक विचार क्यों नहीं हो पा रहा है कही दाल में मिलावट तो नहीं है।  धरमजयगढ़ के आसपास बंग  समाज को पुर्नवास नीति के तहत 635 परिवार को लगभग 3900 एकड़ भूमि जीवन यापन के लिए आवंटित किया है। जिसमें सत्तापक्ष के सहमति के अनुसार S.E.C.L. में  2000 एकड़ व K.P.C.L. में 1200 एकड़ भूमि अधिग्रहण होना है। तथा नीलकंठ कंपनी बायसी ईस्ट, बायसी वेस्ट कंपनी में इन विस्थापितों की सारी जमीन अधिग्रहित होनी है। पिछले दिनों कुछ स्वार्थी तत्व के लोग भूमि  दलाली में लिप्त रहे, व कम रकबा की भूमि होने वाले लोग धारा 11 के  2016 लगने के बाद 10 वर्षों के बाद बैठक आहूत कर प्रभावित किसानों को भूमि नहीं देंगे का बात कर माइंड वॉस  करवा रहा है। यही लोगों के द्वारा पुर्नवास आबंटन भूमि का भूमि अधिकार प्रमाण पत्र के आधार पर बिना कलेक्टर के परमिशन से प्रभावित क्षेत्र के किसानों से 3-4 लाख में भूमि खरीदकर 14-16 लाख रुपये बेचकर दलाली खाई है , तथा  जब S.E.C.L. कोयला वहन करने के रेल लाईन का विस्तार कर रहा था, तो उस समय विरोध नहीं जताया एवं भारतमाला परियोजना प्रभावित किसानों के साथ कमीशन का झोलझाला किए है। पूर्व में D.V. Power के खिलाफ कोर्ट जाकर फिर वापस ले लेना , अब S.E.C.L प्रभावित लोगों को गुमराह करने लगे है।


पुनर्वास आवंटन भूमि पिछले समय बिना कलेक्टर के आदेश पर खरीदी-बिक्री होना तथा नियम विरुद्ध डायवर्सन होना सवालों के घेरे में है तथा कलेक्टर के पास अभी भी 25-30 लोगों के द्वारा भूमि बेचने के लिए आवेदन दे रखा है। वर्तमान कलेक्टर ने पूर्व कलेक्टर की तरह उन प्रभावितों  क्षेत्र तथा आवंटन भूमि का बेचने के लिए रोक लगा दी है। जिस कारण दलाली कर रहे लोगों की हाथ पांव फूले हैं। भविष्य में अपने इन कृत्यों को आगे बढ़ाने के लिए अधिग्रहित किसानों को बरगला रहे हैं के.पी.सी.एल. के द्वारा भूमि अधिग्रहण करने की प्रक्रिया में अभी धारा 7 का प्रकाशन किया है। वन भूमि क्लीरेंस के लिए वन विभाग धरमजयगढ़ के प्रमुख अधिकारी कंपनी के आदमी को लेकर एरिया  घुमाते  हुए नजर आए थे। अभी इन कंपनी की धारा 9, 11, 15 नहीं लगा है उसके विरुद्ध कोर्ट जाने पर कारगर साबित हो सकता है। पर उन लोगों को तो..."

संपादक : दीपक कुमार हलदार
मेरा नाम दीपक कुमार हलदार है, और मैं Hamar Goth News 24 का संस्थापक एवं संपादक हूँ।

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